अधिकतम का फल चखने के बाद भी


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खुद के पास
कुछ भी अधिक हो या
कम मात्रा में लेकिन
जिंदगी भर
होड़ में रहता है
अधिक से अधिक कमाने की
सुबह से रात तक
भागता ही रहता है बेतहाशा
पैसा कमाने में
सुख सुविधाएं जुटाने में
भोग विलासिता से अपने जीवन को
गुजारने में
एक स्वर्ग से सुंदर जहां को
इस धरती पर बसाने में
अपने हर स्वप्न को हकीकत के
धरातल पर उतरता हुआ देखने में
लोग अपनी जान की बाजी लगा देते हैं
एक अधिकतम की सीमा को
हासिल करने में
अधिकतम की सीमा को
प्राप्त करके भी पर
संतुष्ट नहीं होते
अधिकतम में संतुष्ट जब नहीं होते तो
कम में तो तनाव में आ जायेंगे
कितना भी अधिक से अधिक
प्राप्त कर लें लेकिन
ऐसी मानसिकता के लोग कभी खुश तो
हो पायेंगे नहीं  
सब कुछ मनचाहा पाने के बाद भी
अकेलेपन के शिकार हो जायेंगे
रिश्तों को इधर-उधर टूटकर बिखरा
हुआ पायेंगे
मानसिक रूप से बीमार हो
जायेंगे
जीवन में अधिकतम का फल
चखने के बाद भी
भूखे प्यासे और विचलित रह
जायेंगे
अंत में
शून्यता को ही पायेंगे।


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