in

Vaadein: A Hindi poem by Nisha Tandon

किए थे वादे कुछ खाई थी क़समें
ज़िंदगी की साँझ तक तुम मेरे साथ चलना
बदल जाएगा मौसम बदल जाएगी ये रुत भी
बदलते वक़्त के साथ मगर तुम मत बदलना

आएँगी मुश्किलें अनजान रास्तों पर
उलझन भरी राहों पर तुम हर क़दम सम्भलना
जब कभी ज़िंदगी के दोराहे पर खड़ा पाओ मुझको
कुछ क़दम बढ़ा कर तुम मेरा हाथ पकड़ना

कह ना पाए जब कभी किसी से कोई बात दिल की
गुज़ारिश थी तुमसे तुम ही मेरे हमराज़ बनना
कुछ लम्हों की दूरियाँ गर कभी आ भी जाएँ
मेरे इंतज़ार में मगर तुम तमाम उम्र गुज़र करना

हैं मुसाफ़िर कुछ घड़ी के आज , हैं सांसें अधूरी
मेरी आख़िरी साँस के तुम हमनफ़ाज बनना
बदल जाएँगी तारीख़ें क़िस्मत की हमारी
मगर मुक़द्दर के एक बार फिर तुम हमसफ़र बनना

आज ढलती उम्र की दहलीज़ पर खड़े हैं हम दोनों
मुझसे किए वादे को हमदम मेरे तुम याद रखना
छूट जाए साथ अब अगर किसी भी वजह से
अपनी रूह को मेरे बाद ही तुम आज़ाद करना