उस जंगल के दरख्त
एक दूसरे के इतने
करीब थे कि
उन्हें जोर से चिल्ला कर
शोर मचाकर
आपस में बातें करने की
कभी कोई जरूरत नहीं पड़ी
वह तो अक्सर खामोश रहना ही
पसंद करते थे
वह एक दूसरे के प्रेम को
बखूबी समझते थे
उन्होंने अपने रिश्ते को
अपनी जड़ों सा ही बड़ी मजबूती से
बांध रखा था
कभी दिल बेकाबू हो जाने पर
वह एक दूजे के कानों में
फुसफुसा लिया करते थे
यूं तो सदियां बीत जाती थी और
वह आंखों ही आंखों में
अपने दिल की प्यार भरी बातें
बिना बतियाये भी
कर ही लिया करते थे।
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