एक सपना
जो कभी पूरा नहीं होगा
जब ऐसा मान ही लिया है तो
वह पूरा होगा भी आखिरकार क्यों?
हर सुबह के बाद
रात आयेगी
रात आयेगी तो
आंखों में नींद भर जायेगी और
गहरी नींद में ख्वाब न दिखें
यह तो नामुमकिन है
सुबह आंख खुलने पर
वह याद न रहें तो
इसमें कोई बुराई नहीं
नींद किसी की उसकी अपनी जागीर होती है
उसकी जिंदगी की तरह
ख्वाब देखने की उसे पूरी इजाजत है
चाहे तो रात भर
वह पूरे होते हैं नींद में ही
हकीकत में न भी हों तो
क्या गम है?
यह मानकर हमेशा चलो कि
हम तो ख्वाब अपनी पलकों
की सेज पर सजाते ही इसलिए हैं कि
वह हमारी खुली आंखों के सामने
कभी पूरे न हों
पूरे होंगे एक बड़ी तादाद में तो
दर्द नहीं देंगे
दिल में दर्द नहीं होगा तो
सुंदर सपनों का निर्मित होना ही
बंद हो जायेगा हमेशा के लिए
जो देखा जाये तो फायदे का नहीं बल्कि
घाटे का सौदा होगा।
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