यह आसमान गर न होता तो


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नीले आसमान का
विस्तृत फैलाव
मुझे बहुत अच्छा लगता है
ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि
यह अपनी बलिष्ठ भुजाओं को
फैलाकर
सबका आलिंगन करने के लिए
प्रतिबद्ध हो
कभी यह एक शामियाना लगता है तो
कभी एक नीली छतरी
कभी एक मां की ममतामयी चुनर तो
कभी एक पिता का सुरक्षा कवच
कभी यह एक सितारों का जहां
मालूम पड़ता है तो
कभी प्रभु के निवास स्थान सा
कभी बादलों के एक गान सा तो
कभी चांद के एक सुंदर मकान सा
कभी परियों के एक देश सा तो
कभी ऋषि मुनियों की एक पावन स्थली सा
यह आसमान जमीन से
देखने पर एक रहस्यमयी दुनिया सा
दिखता है
इसके पास जाकर तो न जाने
और कितने इसके रहस्यों से पर्दा उठेगा
सोचो यह आसमान गर न होता तो
यह जमीन इसके बिना कितनी
अकेली होती
मैं कितनी तन्हा होती
यह दुनिया जो इसके आंचल तले
बसी हुई है
कितनी वीरान होती।


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