मेरे सपनों की मंजिल
तेरी यादें ही हैं
वह जीवंत हो उठती हैं
जब मैं नींद में होती हूं और
सपनों की दुनिया में विचर रही होती हूं
जब मेरी आंखें खुली होती हैं और
सपने कहीं नहीं होते तो
वह फिर महज यादें होती हैं
जीवित नहीं अपितु
मृत अवस्था में।
मेरे सपनों की मंजिल
तेरी यादें ही हैं
वह जीवंत हो उठती हैं
जब मैं नींद में होती हूं और
सपनों की दुनिया में विचर रही होती हूं
जब मेरी आंखें खुली होती हैं और
सपने कहीं नहीं होते तो
वह फिर महज यादें होती हैं
जीवित नहीं अपितु
मृत अवस्था में।
0 Comments