यह जो घर है
जिसमें मैं रहती हूं
महज एक ईंट और गारे से बना
कोई मकान नहीं है बल्कि
मेरी आस्था का एक मंदिर है
मेरी यादों का एक जहां इसमें
बसता है
मेरे मां-बाप का अक्स इसके
जर्रे जर्रे में रहता है
हर कमरे की दीवार
मुझे उनकी मौजूदगी का अहसास कराती है
वह दोनों
इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन
हैं क्योंकि
मेरे साथ जुड़ी उनकी
यादों की कहानियां
इस घर की किताब के पन्नों पर
जो हैं इस घर की दीवारें ही पर
स्वर्णिम अक्षरों से लिखी हुई हैं
मैं उन्हें पढ़ती रहती हूं और
मन ही मन दोहराती रहती हूं
यह कभी न खत्म होने वाला
एक अतीत की घटनाओं का पहिया है जो
जब तक मैं जीवित हूं
बिना एक पल को भी रुके
चलता रहेगा
इस यादों के मंदिर की
कोई दीवार कभी नहीं टूटेगी
बेशक खड़ी होनी होगी तो
कोई नई दीवार इसमें खड़ी हो
जायेगी
किसी को याद करना और
निरंतर याद करना
किसी पागलपन की निशानी
नहीं है बल्कि
यह तो किसी की सच्ची मोहब्बत की
इंतहा है
अपने मां-बाप को भी
जो जीते जी भूल जाये तो
इससे बड़ा गुनाह इस दुनिया में
और क्या होगा
हजार दफा वह मंदिर जायें
लाख धर्म की बातें करें
हर रोज सुबह शाम पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करें लेकिन
ऐसी अधर्मी औलाद को प्रभु का आशीर्वाद कभी न प्राप्त होगा।
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