वो अनमोल लम्हे


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कुछ पल प्यार के
कुछ पल दुलार के
कुछ पल प्रेम के श्रृंगार के
जब भी मिलें
इन्हें लपककर
अपने आंचल में कैद कर लो
यह वो अनमोल लम्हे होते हैं जो
बमुश्किल किसी को कभी-कभी ही किस्मत से मिलते हैं
शुक्रिया अदा करो
परवरदिगार का कि
प्रेम से परिपूर्ण पलों का
तुम्हें अहसास हुआ
अनुभव हुआ
दीदार हुआ
यह वह वक्त की शाख होती है
जिस पर बैठकर तुम्हें एक अलौकिक शक्ति का आभास होता है
तुम प्रभु जैसा ही कुछ असंभव पा लेते हो
तुम्हारी जन्मों की तपस्या इस मुकाम पर आकर सफल होती है
तुम पूर्णता के चरम को अनायास ही पा लेते हो
यह अविस्मरणीय पल तुम्हें जीवन के आने वाले समय के लिए एक सशक्त आधार प्रदान करते हैं।


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