वक्त का कोई भी लम्हाऐसा न होगा
जब वह मेरे करीब आयेगा और
मुस्कुरायेगा
मेरी परछाई भी
कहीं भूले भटके पड़ी जो
उसके सामने तो
वह उसको भी आग लगाकर
जर्रा-जर्रा झुलसायेगा।
वक्त का कोई भी लम्हाऐसा न होगा
जब वह मेरे करीब आयेगा और
मुस्कुरायेगा
मेरी परछाई भी
कहीं भूले भटके पड़ी जो
उसके सामने तो
वह उसको भी आग लगाकर
जर्रा-जर्रा झुलसायेगा।
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