पानी के एक बुलबुले सी है
यह जिंदगी लेकिन
इसकी ख्वाहिश फिर भी है
एक लबालब जल से भरे
निरंतर ही बहते
एक दरिया बनने की
जिंदगी की उम्र थोड़ी बढ़ भी जाये लेकिन
कहानी इसकी छोटी ही है
यह एक आखिरी मुकाम पर
खत्म भी होती है
इसे फिर न कोई सुनने वाला होता है
न ही कोई सुनाने वाला
जिंदगी रहते हुए भी
कुछ बदनसीब तो ऐसे भी होते हैं
जिन्हें जिंदगी तो मिलती है लेकिन
जीने के लिए खुशियों भरा
एक पल भी नहीं।
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