कागज की
एक किश्ती बनायेंगे
अपने घर के पास बहते
एक दरिया में
उसे फिर बहायेंगे
वह इतनी छोटी सी होगी कि
उसमें हम बैठ तो नहीं पायेंगे लेकिन
जब तक आंखों से होगी नहीं ओझल
उसे एकटक देखते तो जायेंगे।
कागज की
एक किश्ती बनायेंगे
अपने घर के पास बहते
एक दरिया में
उसे फिर बहायेंगे
वह इतनी छोटी सी होगी कि
उसमें हम बैठ तो नहीं पायेंगे लेकिन
जब तक आंखों से होगी नहीं ओझल
उसे एकटक देखते तो जायेंगे।
0 Comments