मैं जटिल हूं
तू पारदर्शी
हम दोनों में है पर
एक समानता
तालाब के नीले जल में
छवि तेरी भी बनती है और
मेरी भी बन पाती है
हम दोनों उस जगह लगते हैं फिर
हमशक्ल
हम दोनों की असमानता का भेद वहां
मिट जाता है
वहां हम दोनों बिल्कुल
एक जैसे लगते हैं
एक खुले आसमान से ही
विस्तृत, शांत और
स्थिर।
0 Comments