रिश्ता था
दिल का
समय की आंधी ने
इसे तोड़ने की
लाख कोशिश करी लेकिन
अपने इस मकसद में
कामयाब हो नहीं पाई
ऐसा हो जाता है अक्सर कि
दो दिलों के बीच
कुछ समय के लिए
दूरियां बन जाती हैं
एक खामोशी सी चारों तरफ पसर
जाती है
एक सन्नाटा सा मकड़ी के जालों की
तरह सर्वस्व फैल जाता है लेकिन
यह कोहरे की धुंध
छट भी जाती है जब
बादलों के पीछे से सूरज उगता है
फूल खिलते हैं
फिर मुरझाते हैं
फिर नये सिरे से उगते हैं
ऐसे ही यह दिलों के बीच पलते
रिश्ते होते हैं
जुड़ते हैं
फूलों से खिलकर महकते हैं
चिड़ियों से चहचहाते हैं
कुछ देर के लिए खामोश हो जाते हैं
ठहर जाते हैं
कहीं खो जाते हैं लेकिन
दिल नहीं मानते दोनों के
फिर एक दूसरे से मिलने के लिए
एक दूसरे के नामों को पुकारते हुए
दौड़ते हुए मिलने चले आते हैं।
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