इस जहां के पार


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आसमान से भी आगे
क्या होगा
होना क्या है
कल्पनाओं को साकार करता
एक सपनों सा सुंदर जहां होगा
उस स्थान तक
पैदल चलकर नहीं अपितु
ख्वाबों और ख्यालों के पंख अपने
तन और मन की देह पर लगाकर
उड़कर ही पहुंचा जा सकता है
इस संसार में जो सुख हासिल न हो
सका अपने मन मुताबिक
वह सब यहां उपलब्ध है
खुशियों का असीम भंडार है यहां
तुम उपहारों को लेते-लेते थक जाओगे लेकिन
इस जादुई लोक के वासी
तुम्हें एक से बढ़कर एक
सुंदर उपहार देते हुए नहीं थकेंगे
इस जहां में तुम्हें तृप्ति, संतुष्टि,
मुक्ति हासिल होगी
इस जहां के पार फिर आगे किसी
अन्य जहां की तलाश तुम्हें न होगी।


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