मैंने तुम्हें फिर से देखा
बार-बार देखा
एकटक देखा
अश्रुपूरित आंखों से
अपलक देखा
इस जिंदगी में
तुम्हारी आखिरी विदाई के समय
दोबारा कभी न मिलने के लिए देखा
मैंने समय के साथ फिर
खुद को संभाला
मैंने तुम्हें दिन में
अपनी यादों में देखा
रात को स्वप्न में
ख्यालों के तानों बानों में देखा
मैंने तुम्हें इस कायनात के
जर्रे जर्रे में देखा
मैंने तुम्हें अपने दिल में खोजा
और तुम्हें पाया भी
मैंने तुम्हें अपने नयनों के दर्पण में
हमेशा के लिए कैद कर लिया
तुम मुझे देखकर मुस्कुराये तो
मैं भी उदास थी
तुम्हारे बिना पर
तुम्हें अब पाकर
निराकार ही सही
लेकिन अनायास मुस्कुरा उठी
मैंने तुम्हें खुद में
पूर्णरूपेण पा लिया
मैंने तुम्हें फिर से देखा लेकिन
इस बार
एक बिल्कुल नये रूप में
नये रंग में
नई ऊर्जा के साथ
नई चेतना के साथ
नई कली की एक ताजगी भरी
मुस्कुराहट के साथ।
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