समय की धारा


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समय की धारा
मुझे अपने साथ
आगे की ओर बहाकर ले जा रही है या
पीछे की ओर धकेल रही है या
खुद गतिमान होते हुए
मुझे स्थिर बना रही है
यह मुझसे दगाबाजी कर रही है या
मुझ पर कोई रहम की बरसात कर
रही है
मैं जो कुछ भी घटित हो रहा है
उसे ठीक प्रकार से समझ नहीं
पा रही
मेरे जीवन की नैया भगवान
भरोसे है
मैं ईश्वर के सिवाय
किसी अन्य की मन की मंशा को
जान नहीं पा रही।


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