सपनों की दुनिया में


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अतीत के अंधकार को पीछे छोड़ते हुएभविष्य को उज्जवल बनाने के लिए
वर्तमान में प्रवेश करने का प्रयास तो
हर किसी को करना ही चाहिए लेकिन
एक नये युग की शुरुआत करना
इतना आसान भी नहीं
नये सपने भी आंखों में तभी सज पाते हैं
जब आंखों में आंसुओं का सैलाब न होकर मुस्कुराहटों के कंवल खिले हों
मन के आकाश में आशाओं के पंछी उड़ते हों
दिल की जमीन पर मृग कुलांचे भरते हों और मोर नृत्य करते हों
एक बुझती हुई दीये की लौ से कोई
एक सितारे सा टिमटिमाते रहने की उम्मीद बांधे तो बांधे भी कैसे
नये सपने अंखियों की चिलमन पर
तभी सजते हैं जब
इन्हें इसमें उतरने के लिए कोई सुंदर धरातल मिले फिर भी
जब तक यह जीवन का सफर है
सपनों की दुनिया में भी
एक कदम बेशक आहिस्ता से
उठाने में हर्ज ही क्या है।


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