शायद मैं उसके लिए कुछ करती हूं


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आपके लिए मैं जो करती हूं

वह आप जो करते हैं

मेरे लिए

उसके समक्ष कुछ भी तो नहीं

यह सच है

यह मनुष्य की प्रवृत्ति है कि

वह दूसरों से

लेता अधिक है और

देता कम है लेकिन

अपने न के बराबर

कार्यों का

संपूर्ण जगत में गुणगान

बहुत बढ़ चढ़कर करता है

दिल के साफ लोगों की

उपलब्धता

इस दुनिया में

दिन प्रतिदिन

कुछ कम होती प्रतीत हो रही है

ऐसे लोग

अपने क्या,

पराये क्या

हर किसी की मदद करने से

कभी पीछे नहीं हटते

अपनी प्रशंसा के

दो शब्द सुनने की भी इन्हें

चाह नहीं होती

यह भगवान के

इस धरती पर भेजे हुए

दूत से ही होते हैं

इनका कोई अपने लिए स्वार्थ नहीं होता

इनको किसी प्रकार का कोई

लालच नहीं होता

प्रभु ने इन्हें बड़े दिलों के

कहीं उपहार ही दे रखे होते हैं

मैं ऐसे लोगों के सामने

एक बौना किरदार हूं

मैं इतनी तो अवश्य

कोशिश करती हूं कि

मेरे व्यवहार से किसी के दिल को

ठेस न पहुंचे

बाकी का आंकलन

मेरे बारे में

वह व्यक्ति ही बेहतर

कर सकता है

जिसके बारे में मेरा सोचना है कि

शायद मैं उसके लिए कुछ करती हूं।


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