रिश्ता अनमोल वही होता है जो
बिना किसी रूकावट के
जीवन भर साथ चले
दुनिया के मेले में
एक भीड़ की तरह ही
कहीं समय की आंधी में खो न जाए
भगवान से रिश्ता
तत्पश्चात किसी का अपने
मां-बाप से रिश्ता बेमिसाल होता है
इससे ऊपर कुछ नहीं
रिश्ते बनते हैं, बिगड़ते हैं
कुछ अनमोल लम्हे अवश्य दे
जाते हैं लेकिन
ताउम्र टिकते बमुश्किल हैं
कोई खुद से ज्यादा जो
किसी और को चाहे
उसे दिल से प्यार करे
उसका हर पल ख्याल करे
उसे अपनी आत्मा के दर्पण में
उतार ले
उसकी आंखों में कभी आंसू की
कोई बूंद न आने दे
उसके मन को किसी भी तरह की
ठेस न पहुंचाए
उसे अपने जीवन में सर्वोच्च स्थान दे तो रिश्ता तो अनमोल वही हुआ।
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