यह जमीं और आसमां


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कहीं यह जमीं न होती और
आसमां न होता तो
मैं कितनी तन्हा होती
यह जमीन
मुझे अपने पांव
इसके ऊपर रखने की जगह देती है तो
यह आसमान
मेरे सिर को ढकने के लिए
एक छत देता है
मुझे स्वाभिमान से
सिर ऊंचा उठाकर
जीना सिखाता है
मेरी कल्पना की तस्वीरों में
अपनी तूलिका से रंग भरता रहता है
मेरे सपनों को नित्य दिन
एक नई उड़ान देता है
मेरे ऊपर सौगातों की बरसात
करता रहता है
मुझे सूरज, चांद, सितारे,
बादल, बारिश, पक्षी और भी
न जाने क्या-क्या देता है और
यह जमीन
प्रकृति का सौंदर्य,
पेड़ पौधों की हरियाली और
रंगबिरंगे फूलों की बहार
उपहार स्वरूप।


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