जो होता है जिंदा
उसी पर तो रहता है
मौत का पहरा
जब यह आती है तो
कभी तेज
कभी मद्धम तो
कभी धीमी होती है इसकी रफ्तार और
जब एक अनदेखे सफर पर ले जाती है
अपने साथ मौत के मुसाफिर को तो
गति होती सबकी एक सी है।
जो होता है जिंदा
उसी पर तो रहता है
मौत का पहरा
जब यह आती है तो
कभी तेज
कभी मद्धम तो
कभी धीमी होती है इसकी रफ्तार और
जब एक अनदेखे सफर पर ले जाती है
अपने साथ मौत के मुसाफिर को तो
गति होती सबकी एक सी है।
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