किसी से मित्रता करनी या
किसी समुदाय से जुड़ना तभी
लाभप्रद है जब वह आपको
एक परिवार जैसे अपनेपन का अहसास
देता हो
वहां भी अगर आप हैं
एक भीड़ में अंजान चेहरे जैसे ही तो
कोई फायदा नहीं
कोई आपको अपनाये या नहीं
इसका प्रभाव खुद पर न लेते हुए
अपनी तरफ से यह प्रयास करें कि
सबको एक परिवार की तरह अपनायें
किसी से कोई भेदभाव न करें
कुछ अच्छा नहीं कर सकते तो
बुरा भी न करें
मदद करने की स्थिति में जो न हों तो
खामोशी की चादर ओढ़ लें
कोई कितना भी अपना हो
वह जब तक आपसे सलाह न मांगे तब तक
बिना बात उसके निजी जीवन में
कूदे फांदे नहीं
बहुत ज्यादा बोलने से या
हस्तक्षेप करने से
आदमी अपनी इज्जत खो देता है
माना इस दुनिया में अच्छे लोगों की
कोई कमी नहीं लेकिन
एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि
कोई दूसरा न तो आपके
अभिभावक हैं और
न ही आपकी प्रतिछाया जो
आपकी भावनाओं का शत प्रतिशत
सम्मान करेंगे
मित्रता या समुदाय में जगह
सिर्फ प्रेमभाव से नहीं अपितु
बलिदान से अधिक बनती है
यह सुनने में एक बार अजीब
लगता है लेकिन
ध्यानपूर्वक सोचें तो
यह एक कड़वा सत्य है।
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