दर्द के दरिया को
हंसकर पार करना है
डगमगाती नाव की पतवार को
जकड़े हुए हाथों से
थामे रखना है
अपने गम भुलाकर
दरिया के आंसुओं के सैलाब के
दुख का बोझ भी कम करना है
खुद में बस इतना हौसला भरना है कि
बिना डूबे सकुशल किनारे तक पहुंचना है और
जीत का सेहरा अपने सिर बांधना है।
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