उस हसीना के चेहरे का रंग
कुछ और खिल गया
जब उस पर उसके गुस्से का रंग
छलक गया
किसी को गुस्सा जब आता है तो
उसके चेहरे का रंग
लाल होकर
एक गुलाब के फूल सा खिल
जाता है
चेहरे पर बहारों का एक अंबार सा
बिछ जाता है
यह अलग बात है कि
थोड़ा सा आंधी तूफान के वेग के
साथ
थोड़ा बहुत गुस्सा आना भी
सेहत के लिए आवश्यक है
क्रोधित होने से मन में भरा गुबार
बाहर निकल जाता है
व्यक्ति तनाव मुक्त हो जाता है
उसकी सुंदरता में इजाफा होता है
उसका रंग रूप
एक चमकते सूरज सा
एक सुनहरे चांद सा
एक फूलों की सुगंध सा
महक जाता है
कृद्ध होना भी एक सामान्य एवं प्राकृतिक
प्रक्रिया है
हमेशा हर समय
हर बात पर
मुस्कुराते रहना
अप्राकृतिक है
यह हमेशा संभव नहीं
आवश्यक भी नहीं
क्रोधित होना
कभी-कभार
बहुत ही आवश्यक है
ऐसा करने से
यकीन मानिये
आपका व्यक्तित्व आकर्षक
बनता है
आपका आत्मविश्वास बढ़ता है
आपको आपकी सही बातों को
समाज के समक्ष बेझिझक
होकर रखने पर
अच्छे लोगों का समर्थन भी
मिलता है।
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