एक ख्वाब है जन्नत


0

मैं हूं
एक सुंदर सपना
सुबह, दोपहर, शाम हो या
गहरी काली स्याह रात
बंद आंखों या
खुली आंखों से
सपने देखना ही
मेरा है काम
मैं जो चाहे पा लेती हूं
सपनों के जरिए
मैं अपने मन मुताबिक
जी लेती हूं
सपनों के जरिए
जिंदगी बड़ी बेरहम है
देती कम है
छीनती है ज्यादा
एक ख्वाब ही ऐसी जन्नत है
जहां हर ख्वाहिश पूरी होती
दिल के दरवाजे पर
कभी नहीं लगता
मायूसी का ताला।


Like it? Share with your friends!

0

0 Comments

Choose A Format
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals