इस दलदल में


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हर किसी ने
अपने चेहरे पर
मुखौटे पहने हुए हों
यह जरूरी नहीं लेकिन
यह सत्य है की
सबसे अधिक समर्थन पर
मिलता उसी को है जो
भांति भांति के वेशभूषा धारण
करता रहता है
जिसमें दोगलापन है
जिसमें लेश मात्र की सच्चाई नहीं है
कारण सीधा स्पष्ट है कि
वह आपके ही जैसा है
उसके झूठ में गजब का आकर्षण
होता है
सच तो हमेशा कड़वा होता है
दिल को चीरता हुआ
इस दलदल में लेकिन
हम लोग बुरी तरह से
अब और अधिक
फंसते चले जा रहे हैं
नकाब लगाये इधर-उधर घूमोगे तो
उसका बोझ खुद को ही उठाना पड़ेगा
आज नहीं तो कल
उसका अच्छा खासा खामियाजा
भुगतना होगा
इस दुनिया में
जितना सब असली होगा
बिना नकली आवरण का
वह उतना स्थाई होगा,
टिकाऊ होगा
आज नहीं तो कल
खुद को और सबको  
अवश्य लाभान्वित करेगा।


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