इस ट्रेन के सफर में


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कोई भी सफर हो

वह सुहाना ही लगता है

बशर्ते वह मुसाफिर को

सही सलामत उसकी मंजिल तक पहुंचा दे

ट्रेन की यात्रा तो रोमांच से भरी होती है

दिल करता है कि यह सफर जारी रहे

एक लंबे समय तक

ट्रेन पटरियों पर दौड़ती रहे

नयनों के दर्पण से टकराते

खिड़की के रास्ते अंदर आते

बाह्य दृश्यों को पल-पल बदलती रहे

हवा के ठंडे और ताजे झोंकों को

सांसों में भरती रहे

आवाजों का शोर कानों में पड़ता रहे लेकिन

ऐसे में किसी की खामोशी को तोड़ने वाला

कोई न हो

कितनी मस्ती

कितनी चहल पहल

कितना लुत्फ होता है

इस ट्रेन के सफर में

वह तो जिसने किया हो

वही जान सकता है

मंजिल जरा देर से आये

ट्रेन थोड़ा आहिस्ता चले

लेट हो जाये

यह तलब एक चाय की चुस्की सी ही

लगी रहती है।


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