अहोई अष्टमी का त्योहार माताओं का है प्यारा
संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन की है दुआ
अहोई माता की पूजा सच्चे मन से की जाती है
और उनकी कृपा से हर मनोकामना पूरी होती है
कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी अहोई अष्टमी कहलाती है
इस दिन माताएं अपनी संतान के लिए व्रत रखती हैं
अहोई माता की कथा श्रद्धा से सुनी जाती है
और उनकी कृपा से संतान की रक्षा होती है
अहोई माता की पूजा सरोवर या नदी के किनारे की जाती है
सतिया या अहोई की तस्वीर मिट्टी से बनाई जाती है
दूध, चावल और अन्य भोग अहोई माता को चढ़ाए जाते हैं
और उनकी कृपा से संतान को सुख और समृद्धि मिलती है
अहोई अष्टमी का त्योहार माताओं के प्यार का प्रतीक है
संतान की दीर्घायु और खुशहाल जिंदगी की है कामना
अहोई माता की कृपा सबपर बरसे
और संतान को मिले सुख, समृद्धि और लंबी उम्र
अहोई अष्टमी की रात तारे की पूजा होती है
और माताएं अपनी संतान के लिए प्रार्थना करती हैं
अहोई माता की महिमा अपरंपार है
और उनकी कृपा से संतान की हर मनोकामना पूरी होती है।
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