मैं हूं किसी अप्राप्य नागमणि सी


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देखने में तो हीरा

लगता है पर

शायद है नकली

मैं इसे धारण कर लूं

अपना लूं

संभाल लूं तो संवर जायेगा

मेरे साथ जिन्दगी का सफर तय

करेगा तो

भ्रम पैदा करेगा जैसे हो यह असली

इसका कारण सीधा सा यह कि

मुझे पता है कि

मेरा दिल एक दर्पण सा साफ और

मैं हूं एकदम असली

मुझे चाहे नाम दे दो तुम

सोने का, चांदी का या

किसी हीरे का लेकिन

बिना किसी राजघराने,

सिंहासन, मुकुट,

दरबारी और प्रजा के

मैं हूं कोई चीज एक

असली सी

प्राकृतिक

जीवंत सी

सुनहरी व सुगंधित सांसें भरती

हीरे के लश्कारे मारती

मैं हूं किसी अप्राप्य

नागमणि सी।


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