कोई तारा कभी जो टूटे तो


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कभी जो तुम्हें
फुरसत मिले तो
अपना सिर ऊपर की तरफ उठाकर देखना कि
तारों से भरा एक जहां
रात्रि का,
चांद को साथ लिए
अपना सफर तय करता यह कारवां कितना सुंदर प्रतीत होता है
परियों का एक देश है यह
काश मैं वहां तक का सफर
तय करके
उन्हें महज जमीं से अपनी आंखों से
ही नहीं
छूकर भी गहराई से उनके
अस्तित्व को महसूस कर पाती
कोई तारा कभी जो टूटे तो
उससे ही मिलने की दुआ करती और
वह जो होती कुबूल तो
उड़कर उस तारों से सजे
आशियाने में
कुछ पल गुजारने के लिए
पहुंच पाती
दूर से जब इतने दिलकश हैं तो
पास पहुंचने पर तो कहर ढायेंगें टिमटिमाते,
जगमगाते,
झिलमिलाते से ही
मेरा स्वागत करने के लिए
अपनी बाहें फैलायेंगे
मुझे आगोश में भर लेंगे तो
अपनी देह की चमक
कुछ अंश सही
मुझे भी उपहार स्वरूप दे ही
देंगे।


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