• Ummeed: A poem by Dr. Charu Kapoor

    सूनी सड़कें, सूने कूचे, सूने हुए हैं गलियारे कहां गईं सब रौनकें, कहां गए हैं शहर हमारे रंगीन सपने लिए आंखों में, गांव छोड़ यहां...

  • Ummeed- Maa ki Lau: A poem by Mani Saxena

     वर्षों सेइंतज़ारकीअग्निमेंजोअखंडजलरही, तेरे आनेकीचाहतमेंजोकभीभीनबुझसकी, उम्मीद कादियाजलागयीतीलीइकमाचिसकी, बरसों सेजोतपरहीएकलौमाँकीउम्मीदकी। हो तूफ़ानयासन्नाटेकोचीरतीतेज़हवाआँधीकी, या बिनबादलमूसलाधारबरसतीबारिशकीनदीसी, स्वयं ईश्वरबजारहेंहोचाहेंशंकनादप्रलयकी, पर नडगमगासकाकोई,एक लौमाँकीउम्मीदकी। मौसम गुज़रेऋतुएँनिकलींसमयकीहरचोटबदली, उम्र सेपहलेउम्रकेहरदौरसेगुज़रीलौतेरेइंतज़ारकी, कभी दियेकीरौशनीसीसजतीकभीधधकतींअंगारोंसी, कभी सुलगतीकभीमचलतीएकलौमाँकीउम्मीदकी।...

  • Ummeed: A poem by Nisha Tandon

    थक कर रुक जाते हैं क़दम कईं मर्तबा, तो दिल संजीदा होता हैशमा के इंतेज़ार में परवाना तू क्यों बेवजह रोता हैतू इश्क़ नहीं जुनून...

  • Ummeed: A poem by Pratima Mehta

    आज के संदर्भ में भय और आशंका का व्यूह रच गया है। भ्रम और भ्रांति का भ्रमजाल बिछ गया है। अन्धकार का महासिंधू प्रकाश को...

  • Rajkumari: A poem by Anjali Sharma

    खड़ी क्षितिज को दूर निहारती थी एक राजकुमारी ढूंढती अपना अस्तित्व अनुपम विशाल सृष्टि में सारीक्या है मेरा कोई टुकड़ा समस्त ब्रम्हांड सृजन मेंक्यों रहती...

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