मेरी आस्था का दीपक
मेरी आस्था का दीपक देर शाम अंधेरा होने पर जो जलाया था अगली सुबह तक जलता रहा ऐसा लग रहा था कि यह जैसे बुझना...
मेरी आस्था का दीपक देर शाम अंधेरा होने पर जो जलाया था अगली सुबह तक जलता रहा ऐसा लग रहा था कि यह जैसे बुझना...
सांझ की बेला कितनी मनोहरी प्रतीत होती है मन के हर कोने को छूती है तन के वृक्ष में संवेदनाओं की अनुभूति से भरे बीज...
सूरज को एक फूल सा उगने दो फूलों को एक चंदनबन सा महकने दो पेड़ों के पत्तों को बहती हवाओं के साथ बहने दो आसमान...
सोचा था कि यह फूल अभी कुछ समय तक और खिला रहेगा अपनी महक से सबको महकाता रहेगा राह चलते हर मुसाफिर को अपनी सुंदरता...
समय है यह प्रार्थना का अपने ईश को याद करने का दुनिया से दूर जाने का प्रभु के करीब आने का उनके चरणों की धूल...
हर आने वाला पल आता है चला जाता है जैसे ही आता है वैसे ही चला जाता है इसका आना फिर जाना आना फिर जाना...
मन भरसक प्रयत्न करता है कि वह हर परिस्थिति में खुश रहे लेकिन ऐसा मन का आखिरकार फलीभूत हो कहां पाता है मन के ही...
मोहब्बत का फूल खिलता है मुर्झाता नहीं।
दिल में उमड़ रहे ख्यालों को उतारना है एक कागज के टुकड़े पर कलम की स्याही से फूल उसमे प्रेम का फिर कोई रखकर लिफाफे...
दीपक यह चांद सा मेरे दिल के खिलते एक अरमान सा फूलों के मेले सा रोशन एक आस के सवेरे सा एक गीत गुनगुनाता हुआ...
समय जब भी थक हार कर लेटता है तो करवट बदलता रहता है यह खड़े-खड़े भी अपनी स्थिति बदलता रहता है यह बैठता है जब...
डाकिया आया एक खत लेकर बिना पते का।