मेरे शाम के आसमान को
शाम का आसमान आज मुझे धुंधला दिख रहा था बारिश रुक रुक कर सुबह से हो रही थी आसमान गीला और सफेद,काले, स्लेटी, चितकबरे, मटमैले...
शाम का आसमान आज मुझे धुंधला दिख रहा था बारिश रुक रुक कर सुबह से हो रही थी आसमान गीला और सफेद,काले, स्लेटी, चितकबरे, मटमैले...
फूल हो या कोई पत्ता मनुष्य हो या कोई जीव यह इस प्रकृति का नियम है कि जो कोई जा रहा होता है कोई फिर...
जिसके दिल में प्यार होगा वही एक फूलों का गुलदस्ता प्यार से परिपूर्ण प्यार का एक प्रतीक चिन्ह प्यार से किसी को दे पायेगा...
मन के पोखर में जो एक पानी का भराव है वह किसी के कंकड़ मारने से या तार हिलाने से स्थिर से गतिमान हो जाता...
सुबह उठी तो गुलाब की गुलाबी काया पर छोटे छोटे सफेद मोतियों के कणों सी अंकित ओस की बूंदों को अपने गुलाबी होठों के पत्तों...
दर्पण में खुद की छवि निहारकर मैं खुद को ही पहचानने की कोशिश कर रही हूं दर्पण को मैं अच्छे से पहचानती हूं पर इससे...
मैं तो अक्सर अपने दिल की आवाज़ सुनती हूं और पहुंच जाती हूं उसके घर की चौखट तक उसका दरवाजा खटखटाने यह जानकर आश्चर्य होता...
रेगिस्तान के बारे में कोई कहानी लिखनी हो तो भला कोई कैसे लिखे जिस तरफ भी नजर दौड़ाओ बस रेत ही रेत भर तो दिखती...
जीवन के बारे में और खुद के विषय में कुछ न सोचो तो बेहतर है जीवन को और जीवन के साथ जुड़ी खुद की काया...
इस दुनिया को पीछे छोड़ मैं कहीं दूर निकल आया हूं कितने जंगल पार किये कितने कटीले झाड़ों में उलझा कितने वार सहे कितने नुकीले...
यह कैसी वादी है जहां एक नीला आसमान है और उसमें दिख रहे सफेद बादल भी पहाड़ हैं बर्फ की एक चादर से ढके दिखते...
मैं पतझड़ हूं मैं जा रहा हूं तू बहार है तू आ रही है मैं रंगहीन हूं श्वेत श्याम एक धुंधली तस्वीर सा दिखता हूं...