धरती मां की पुकार
जागो उठो ऐ पृथ्वी वासियों कि यह धरती मां तुम्हें पुकार रही आगे बढ़ो सब मिलकर कुछ ऐसे कार्य करो कि पृथ्वी और इसके वातावरण...
जागो उठो ऐ पृथ्वी वासियों कि यह धरती मां तुम्हें पुकार रही आगे बढ़ो सब मिलकर कुछ ऐसे कार्य करो कि पृथ्वी और इसके वातावरण...
रोबर्ट फ्रॉस्ट द्वारा रचित कविता की यह पंक्तियां कि गहन सघन मनमोहन वन तरु मुझको आज बुलाते हैं किन्तु किये जो वादे मैंने याद मुझे...
मैंने तुम्हें कहा था कि मुझे चांद लाकर दो तुम तो मेरे लिए सूरज ले आये मैंने तुमसे शीतलता मांगी थी और तुमने तो मुझे...
रोशनी को यह नहीं पता होता कि वह एक रोशनी है जुगनू को अंधेरे का भय कभी सताता ही नहीं क्योंकि वह खुद में एक...
काश यह मुझे पता होता कि जिंदगी मौत को चुनती है या मौत जिंदगी को तो मैं मौत को जिंदगी के रास्ते से हटाकर मौत...
नाम में क्या रखा है यह बात सच है कुछ नहीं रखा मेरे जैसे नाम के इस दुनिया में न जाने कितने और होंगे नाम...
अर्द्ध विराम बेहतर है पूर्ण विराम से तो पूर्ण विराम तो जीवन खत्म होने पर ही लगना चाहिए जीवन के सफर के दौरान बीच बीच...
सुबह जो सोकर अपने बिस्तर से उठी तो मेरे सिरहाने रखी मोमबत्ती जो मैंने एक प्लेट पर चिपका कर अपने समीप ही रखी एक मेज...
एक माला में जब तक मोती न पिरोए जायें तो वह माला नहीं बनती एक कैनवास में रंग न भरे जायें तो वह एक पेंटिंग...
दिन को सही प्रकार से व्यतीत करके रात को एक चैन भरी नींद सो जायें अगली सुबह या हर सुबह जब भी उठें तो एक...
तुम बिन यह जीवन एक कोरे कागज सा रंगहीन और बेजान सा तुम बिन सब शून्य सब नीरस तुम बिन कहीं कोई रंग नहीं कहीं...
दिल उदास रहता है अक्सर लेकिन मेरे उदास रहने का कारण मुझसे पूछता कौन है किसे है फिक्र कि मेरे बारे में थोड़ा भी जाने...