घर की बेटी
घर किसी को घर सा न लगे तो कोई कहीं कहां जाये घर के बेटा और बहू घर वालों के लिए एक तिनका भी नहीं...
घर किसी को घर सा न लगे तो कोई कहीं कहां जाये घर के बेटा और बहू घर वालों के लिए एक तिनका भी नहीं...
याद आ रही गुजरे जमाने के अफसानों की।
नव वर्ष है नया दिन नई तारीख नई उम्मीदें नये सपने नई मंजिले नये रास्ते सब कुछ है आज नया पिछले बरस की यादों को...
उत्सव मनाने के लिए किसी साल, महीने, सप्ताह, दिन या समय का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं इसके लिए कोई तैयारी न करें बस मन...
चांद सितारे से कोई प्रतिस्पर्धा, जलन या ईर्ष्या द्वेष नहीं करता बल्कि एक दूसरे को सहयोग प्रदान करते हुए अपनी अपनी रोशनी लिए दोनों मिलकर ...
गांव एक छोटा सा, प्यारा सा, न्यारा सा उसमें जो मेला लगा वह भी उसके जैसा ही छोटा सा, प्यारा सा और न्यारा सा उसे...
मैं खुद में कहीं परत दर परत सिमट रही हूं खामोश हो रही हूं गुम हो रही हूं कली से फूल का बनना यह तो...
उसकी मुस्कुराहट एक गुलाब की खिलती कली सी है फूलों की बहार सी है सूरज की किरणों की एक फुहार सी है सारी कायनात उसके...
तेरे से मेरा रिश्ता न खुदा सा न इंसान सा।
मेरे घर की छत से अपना सिर उठाकर ऊपर की तरफ देखने पर एक आकाश नजर आता है मैं जहां जहां जाती हूं यह मेरे...
गर्व है मुझे अपने मां बाप पर जिन्होंने मुझे जन्म दिया और मुझे इस धरती पर लाये मुझे अच्छी शिक्षा दी अच्छे संस्कार दिये अच्छी...
कहीं कुछ न कुछ तो बहुत गलत घटित हो रहा है मेरे साथ उसका व्यवहार अनुचित है अमानवीय है अप्राकृतिक है मन को ठेस पहुंचाता...