मेरे आंसुओं का एक दरिया
मैं जिन्दगी के रेगिस्तान में भटकती भटकती इतनी परेशान हो चुकी हूं कि मेरे चेहरे पर अब सिर्फ उदासी दिखती है न लबों पर मुस्कुराहट...
मैं जिन्दगी के रेगिस्तान में भटकती भटकती इतनी परेशान हो चुकी हूं कि मेरे चेहरे पर अब सिर्फ उदासी दिखती है न लबों पर मुस्कुराहट...
मेरे लबों पे बिखरी मुस्कुराहट को मेरी खुशी का प्रतीक समझने की भूल मत करना मैं जितनी अधिक खुश दिखूं तो बस यह समझ लेना...
यह दुनिया एक अजनबी जगह मेरे लिए तो यहां की हर चीज मुझे अजीब लगती है और विस्मित करती है मुझे यह एक अजनबियों की...
आज मुझे आने वाले कल का है इंतजार उससे पहले दोपहर का फिर सांझ का फिर रात का फिर चांद का फिर सितारों का...
कोई भी गांव एक शहर नहीं है और किसी गांव की सड़क एक शहर की सड़क भी नहीं है गांव की सड़क पर शहर की...
नारंगी रंग का शाम का ढलता सूरज कितना सुंदर प्रतीत होता है एक दुल्हन की तरह ही विदा लेता है अपने बाबुल के घर से...
तुम्हारी काया एक सोने सी दमकती सुनहरी है पीतांबर धारण कर पहन लेती हो जो स्वर्ण आभूषण तो सूरज की आभा भी तुम्हारे सौन्दर्य के...
प्रचंड गर्मी है ऐसे में हरियाली ही याद आती है ठंडी ठंडी हवा चले पेड़ों के हरे हरे पत्ते हिलें हरे हरे तोते भी लाल...
ऐ मेरे प्यारे लाल गुलाब के फूल तुम सूरज की गर्मी के ताप से कितना तप गये हो एक लाल दहकते अंगारे से ही जल...
नीलवर्ण से नीले ओ श्याम मेरे चमकीले कैसे सजे धजे हो अधरों पे बांसुरी धरे हो मोर मुकुट शीश पर विराजे नील कंवल पे हंसिनी...
यह तो तुम्हारे खेलने की उम्र है हंसने की उम्र है मुस्कुराकर खिलखिलाने की उम्र है ऐसे में आज तुम उदास क्यों हो मायूस क्यों...
देखो तो कितनी सुंदर है यह प्रकृति उसके दिलकश नजारे उसकी सुगंधित फिजायें, आसमान की विशालता और दरिया के किनारे हम तीनों भी तो कहने...