गांव की सड़क एक स्वप्न सी
गांव की सड़क तो अब एक स्वप्न सी लगती है अपने शहर से किसी दूसरे शहर की यात्रा करने पर ही बस रास्ते में पल...
गांव की सड़क तो अब एक स्वप्न सी लगती है अपने शहर से किसी दूसरे शहर की यात्रा करने पर ही बस रास्ते में पल...
अतीत के वृक्ष की छाया में ही चलो जी लूं कि वर्तमान में तो मेरे चारों तरफ पतझड़ का मौसम और पेड़ से झड़ रहे...
सूरज लाल क्रोध अगन या प्रेम लगन में।
रंग दो मुझे आज सिर से पांव तक लाल सिंदूरी रंग से मैं हो जाऊं आज अपने श्याम की कि विरह की अग्नि में जलकर...
अपने घर के कमरे में बंद रहती हूं तो लगता है कि जैसे मैंने इस दुनिया की सारी खुशियां पा ली घर के बाहर जो...
मैं वयस्क हूं ऐसा तुम्हें लगता है मैं तो अभी भी भीतर से वही एक शरारती, चंचल, नादान, मासूम, अल्हड़ आंखों में अनगिनत सपने लिए...
पड़ने दो किसी पेड़ की छाया भी मुझ पर कि मेरा तन जलता है न रोको किसी राह पर चलते मेरे कदमों को कि मेरे...
छलकता है दर्द कभी आंसू तो कभी हंसी सा।
पेड़ पर हरे पत्ते अच्छे लगते हैं और गुलदस्ते में महकते हुए लाल गुलाब के फूल सफेद फूल हों तो भी जचेंगे फूल तो फूल...
वस्तुएं जैसे टूट जाती है वैसे ही दिल तक टूट जाता है लेकिन उसकी फिर से मरम्मत करके, उसे जोड़कर अपने जीवन को एक बार...
होली का यह महीना छाया दिल पर मस्ती का खुमार मन रंग लिया सपनों के धरातल पर खड़े होकर होली के दिन तन पर कर...
घर है पर उसमें कोई रहने वाला नहीं कुर्सी है पर उस पर कोई बैठने वाला नहीं परिंदे भी रुख नहीं करते अब तो इस...