होली के रंग
होली के रंग लगते तन पर मन खिलता।
होली के रंग लगते तन पर मन खिलता।
रंगों के उत्सव ने भर दिया मन में उत्साह चेहरे पर रंग दिल में उमंग भूलकर आज सारे गम खुशियां मना लें चलो मिलकर सब...
तुम और मैं कोई दो नहीं एक ही हैं मैं जीवन में चुनती ही उसे हूं अपनाती ही उसे हूं पाती ही उसे हूं अपने...
यह होली के सब रंग तुम्हें हो मुबारक मैं कब कहती हूं कि मुझे किसी की खुशी रास नहीं आती यह चारों तरफ फैले रंग...
होली का त्योहार बिन तेरे फीकी हर फुहार रंग दूसरों पर पड़ता देख अब लगता है अच्छा लेकिन दूर से खुद पर तो पानी का...
थक गई हूं इस जीवन की धका पेल से, जरा पल भर को मेरा सिर अपने कंधे पर टिकाकर मुझे सहारा देकर मेरा मनोबल बढ़ा...
स्वर्ग यहां नरक यहां ऐ दिल बता फिर मैं जाऊं कहां जो कुछ है दिल के भीतर है एक सुंदर सी दुनिया स्वर्ग सी एक...
उसकी आंखें समुन्दर सी गहरी आकाश सी नीली एक हरे उपवन सी एक सौंदर्य के दर्पण सी खामोशी से दिल की बातें कहती सी एक...
यह मन कैसा होता है इस पल खुश अगले पल दुखी यह भी क्या करे जैसा देखेगा, वैसा ही तो फिर सोचने के लिए बाध्य...
किसी नदी के तैरते जल के दर्पण में जो झांककर देखो जो अपनी छवि तो मेरी आंख अपने सिवाय उस नदी के मन के भीतर...
तेरी सुंदरता तेरी मादकता तेरी दिलकश अदा हर महफिल में आग लगाती है तू किसी को देख जो मुस्कुराती है तो उसके दिल पर बिजली...
हर रिश्ता मतलब का है हर रिश्ता कांच से बने दिल को तोड़ता हुआ एक पत्थर की शिला सा है हर रिश्ता एक पहाड़ सा...