• तुम्हारी परछाई

    जब दिल का दर्द बांटने के लिए दुनिया की भीड़ कम लगने लगे और इसके लोग पराये तो अपनी परछाई को अपना हमसफर बना लेना...

  • यह उदासी

    उदासी किसी मेहमान की तरह बस आये और जाये यह दिल की जमीन पर कहीं अपना स्थाई घर न बनाये उदासी बड़ी दुखदाई होती है...

  • यह कैसी आजादी है

    रिश्तों के बंधन में स्वतंत्रता थी घर के बड़े अनुभवी सदस्यों की सिर पर एक वटवृक्ष सी परछाई जो थी अब जो यह बंधन खुला...

  • मेहमान

    मेरे घर जब भी कोई मेहमान आता है तो हाथ में एक तराजू लेकर आता है मेरा वजन उसमें तोलने के लिए सवालों की भी...

  • जुदा होकर

    जिससे हो प्यार वह हो जाये गर जुदा तो उसकी याद सताती है वरना इस बेरहम और जालिम दुनिया में कहां किसी को किसी की...

  • हम दोनों दो अजनबी

    मन में सवाल कई हैं लेकिन मैं अब तुमसे कभी कोई सवाल नहीं पूछूंगी तुम्हारे साथ रहते रहते तुम्हारी रग रग से वाकिफ हो गई...

  • सुन ओ रेलगाड़ी

    तू उतरे जो न पटरी से और किसी हादसे को अंजाम न दे तो सुन ओ रेलगाड़ी तू मुझे इस दुनिया की सबसे प्यारी चीज...

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