तुम्हारी परछाई
जब दिल का दर्द बांटने के लिए दुनिया की भीड़ कम लगने लगे और इसके लोग पराये तो अपनी परछाई को अपना हमसफर बना लेना...
जब दिल का दर्द बांटने के लिए दुनिया की भीड़ कम लगने लगे और इसके लोग पराये तो अपनी परछाई को अपना हमसफर बना लेना...
कोहरा घना है कोहरा मेरे सिर पर एक बादलों के छत्ते सा तना है कोहरे में चारों तरफ कोई मंजर दिखता नहीं कोहरे में एक...
जिन्दगी गुजर रही है मुझे नहीं पता कि यह अच्छी गुजर रही है या बुरी गुजर रही है बस गुजर रही है किसी का...
उदासी किसी मेहमान की तरह बस आये और जाये यह दिल की जमीन पर कहीं अपना स्थाई घर न बनाये उदासी बड़ी दुखदाई होती है...
यह जमीन यह नीला आकाश तन मन सा।
रिश्तों के बंधन में स्वतंत्रता थी घर के बड़े अनुभवी सदस्यों की सिर पर एक वटवृक्ष सी परछाई जो थी अब जो यह बंधन खुला...
मैं कौन हूं एक इंसान एक शैतान एक पशु या इनके बीच की ही कोई कड़ी मैं जिन्दा हूं मैं मृत हूं या मैं भटकती...
मेरे घर जब भी कोई मेहमान आता है तो हाथ में एक तराजू लेकर आता है मेरा वजन उसमें तोलने के लिए सवालों की भी...
जिससे हो प्यार वह हो जाये गर जुदा तो उसकी याद सताती है वरना इस बेरहम और जालिम दुनिया में कहां किसी को किसी की...
मेरे पापा प्यारे पापा दुनिया के सबसे प्यारे पापा जब जब मैं देखूं आपको भूल जाती सब कुछ खो देती अपनी सुध बुध पापा आपने...
मन में सवाल कई हैं लेकिन मैं अब तुमसे कभी कोई सवाल नहीं पूछूंगी तुम्हारे साथ रहते रहते तुम्हारी रग रग से वाकिफ हो गई...
तू उतरे जो न पटरी से और किसी हादसे को अंजाम न दे तो सुन ओ रेलगाड़ी तू मुझे इस दुनिया की सबसे प्यारी चीज...