यह जिंदगी उधार की भी एक प्रतीक्षा कक्ष सी ही
कोई भी प्रतीक्षालयबना ही होता हैइस मकसद के साथ किवहां कोई आराम से बैठकर या खड़े होकरप्रतीक्षा करेकिसी घटना, प्रसंग, नियुक्ति, भेंट आदि के लिएरेलवे...
कोई भी प्रतीक्षालयबना ही होता हैइस मकसद के साथ किवहां कोई आराम से बैठकर या खड़े होकरप्रतीक्षा करेकिसी घटना, प्रसंग, नियुक्ति, भेंट आदि के लिएरेलवे...
जमीं कह रहीआसमान से किप्यासे हैं मेरे लबएक अरसे सेटूटकर बरस जाओ मुझ पर औरमेरी प्यास बुझा दोतृप्त हो जाऊं जब मैं थोड़ा तोकुछ पल...
चेहरा तेरादर्पण में तैरतेएक चांद सा।
फूलों का गुलदस्तान किसी को देना चाहिएन किसी से लेना चाहिएन इसे कहीं किसी अवसर परसजाना चाहिएहम क्यों तोड़ें किसी बगिया सेइतने फूलों कोएक फूलचाहे...
किसी के हृदय की सरलता कोभला कौन समझता हैआजकल के जटिलताओं से भरेजमाने मेंदर्पण भी नकार देता हैकिसी के भोलेपन कोवह भी अब फिदा हैउलझा...
तुम्हारी खामोशीमेरे मन में एक टीस सी पैदाकरती हैजो भी हो कारण लेकिनइसके लिए कहीं मैं खुद कोदोषी ठहराने लगता हूंथोड़ी बहुत देर के लिए...
वह जब भीमेरे करीब आता हैअपनी आंखों से मेरी आंखों कोमिलाता है तोबरबस ही मुस्कुरा जाता हैबस मुस्कुराने भर से हीवो न जाने कितनी अनकहीदिल...
आपकी खामोशीमहज आपकी आदत है याकुछ औरकहीं आप भीतर से कहीं गहरे उदास तो नहींगर ऐसा है तो फिरयह ठीक नहींतोड़नी पड़ेगी फिर तो खुद...
मैं चाहती हूंजैसे तुम अब मुस्कुरा रहे होवैसे ही सारी उम्र मुस्कुराते रहो मुस्कुराते तुम होदर्द दिल के मेरे कम हो जाते हैंकिसी को खुश...
हर समय कांड करती है लेकिनआंखों में शर्म नाम कीअगली के कोई चीज नहींऐसे लोग जीवन में कभीअंधे भी जो हो जायें तब भीअपनी कारस्तानियों...
मां ममता कासागर, मैं उसकाएक किनारा।
देह का सुखकितनी बड़ी चीज है जिसमेंत्याग देताएक कामी पुरुष अपनेमाता-पिता, भाई बहनों औरअपने संपूर्ण परिवार कोसारी उम्र बनकर रहताउस औरत का गुलामएक तिनका भी...