खिलाफ
किसी के खिलाफ होने की भी कोई सीमा होती है दुश्मनी पक्की है तो बोलने की कोशिश फिर क्यों जारी है।
किसी के खिलाफ होने की भी कोई सीमा होती है दुश्मनी पक्की है तो बोलने की कोशिश फिर क्यों जारी है।
कांच का फूल चांद सा चमकता बिना सुगंध।
जिंदगी की जंग में बार बार भले ही शिकस्त मिलती रहे लेकिन खुद को मानसिक रूप से तैयार करके इस लड़ाई को जारी रखने की...
सारी उम्र वह आग लगाते रहे दूसरों की जिंदगियों में पर थके नहीं इसकी वजह स्पष्ट थी क्योंकि वह इस आग के दावानल में खुद...
मैं कल जब छोटी थी और आज जब बड़ी हूं तो बस इतना चाहती थी और मेरी यही अंतिम इच्छा है कि मरते दम तक...
लोग किसी को किस तरह से प्यार करते हैं कि मैं तुमसे प्यार करता हूं या करती हूं कहते हुए भी उनके मुंह से दुर्गंध...
कोई जीते जी तो किसी को पूछता नहीं मरने के बाद क्या खाक पूछेगा यह एक कड़वी सच्चाई है तो क्या अच्छा हो कि जीवन...
ऐ तांगे वाले आज मौसम बहुत गर्म है लू चल रही है भरी दोपहरी है गर्म हवाओं के थपेड़े चेहरे और बदन की त्वचा को...
कभी किसी के दिल की बातों को समझना हो तो पढ़ना सीख लो उसकी आंखों की भाषा को मुंह से बोली गई बातों का नहीं...
आसमान में सुबह होने पर बेशक सूरज किसी दिन न उगे लेकिन जीवन में छाये अंधकार को हटाते हुए प्रकाश की किरणें चारों तरफ फैलाना ...
कभी कभी लगता है कि हम कभी न खत्म होने वाले दर्द से लगातार लड़ने के बावजूद जंग हार गये लेकिन तीव्र दर्द पहाड़ के...
समय कहां रुकता है कभी किसी के लिए समय का पहिया तो चलता ही रहता है निरंतर बिना एक पल भी गंवाये बिना सांस लिये...