सुख की एक परछाई सा
सुख की एक परछाई सा है यह दुख, ग़म और दर्द कभी इसका आकार बढ़ेगा तो कभी घटेगा इसके होने से परेशान क्या होना यह...
सुख की एक परछाई सा है यह दुख, ग़म और दर्द कभी इसका आकार बढ़ेगा तो कभी घटेगा इसके होने से परेशान क्या होना यह...
दर्द पर प्यार का मरहम लगा और दिल खोलकर सहज भाव से मुस्कुरा।
जंगल में सुना था कि सन्नाटा पसरा होता है इसके हर कोने में मुझे तो जंगल कॉटेज में रुक कर ऐसा अनुभव बिल्कुल नहीं हुआ...
मेरे मन के सूनेपन के जंगल के सन्नाटों को तोड़ती कोई फोन की घंटी बजती है तो मेरे तन की शिराओं में एक नया जोश...
जमीन पर खड़ी मैं आसमान को पुकारती हूं कि मुझे प्रेरित करो सिर्फ आज नहीं, हमेशा के लिए ही प्रेरित करो ।
मेरे मन के मन्दिर में रखे दीपक का प्रकाश कभी कभार बीच बीच में अनायास बिना किसी कारण बिना बात कम हो जाता है मैं...
मैं एक तपस्वी हूं अपने मन के पावन तपोवन में मैं दिन रात, सुबह शाम, हर प्रहर, हर पल तप करती हूं अपनी साधना में...
तुम्हारे पत्र ने अभिभूत किया मुझे जीवन के खाली कैनवास पर प्यार का हर एक रंग भरा इसने जीवन का अर्थ समझाया जीवन जीने का...
मेरे दिल में रहती है मेरी मां घर में कहीं नहीं दिखती लेकिन मेरी आंखों की पलकों की पालकी में बैठी है मेरी मां इंसान...
मन भीतर से शांत हो तो बाहरी दुनिया के शोर तन मन को विचलित नहीं करते मन का तार जोड़ लो प्रभु से तो मानवीय...
यह रास्ता बिना मुसाफिर का बिन मंजिल।
एक परी थी उसने धरती पर एक राजा के घर मानव रूप में जन्म लिया वह एक सुंदर कन्या थी उसकी एक छोटी बहन थी...