मैं नीले गहरे समुन्दर को
काश! एक गहरा नीला समुन्दर हो और उसमें रहती मैं ही एकमात्र नीली मछली हों कोई तो दुनिया हो जो मेरी अपनी हो जहां मेरा...
काश! एक गहरा नीला समुन्दर हो और उसमें रहती मैं ही एकमात्र नीली मछली हों कोई तो दुनिया हो जो मेरी अपनी हो जहां मेरा...
या खुदा मेरी ख्वाहिशें पूरी न करना पर मुझे जिंदगी तो बख्शना मैं जिंदा रहूं और कुछ लिखती रहूं कुछ ऐसा बंदोबस्त तो करना।
मैं भी तो हूं एक बंजारन एक बंजर भूमि सी ही मैं क्यों न रह लूं बंजर भूमि की पृष्ठभूमि में ही कहीं जाकर जैसी...
मेरी पतंग आसमान को छूती जमीं पकड़े।
कोई समय ऐसा नहीं जब मेरे मन में सजी अदालत का दृश्य मेरी आंखों के सामने एक चलचित्र सा न चलता रहता हो यहां सारी...
शाम होने पर ढलता है जो सूरज और प्रकाश के संग उसके चले जाने से होता है जो अंधेरा तो सड़क किनारे लगी बत्तियां झिलमिला...
इस दुनिया में भला कौन होगा ऐसा जिसका मन एक अबोध बच्चे सा नहीं होगा और जिसे छुट्टियां अच्छी नहीं लगती होंगी पसरकर बिस्तर पर...
झील सूखी नहीं जल से लबालब भरी है फिर भी हैरान हूं मैं कि यह स्थिर है शांत है मौन धारण करे एक संत महात्मा...
मुझे जीना कब आयेगा सदियां गुजर गई एक जमाना बीत गया यह वक्त ठहर गया मैं भी रुक गई खामोश हो गई थोड़ा बहुत कुछ...
जो बीत रही है मुझ पर शायद उससे कहीं ज्यादा बीतती है हर किसी पर मुझे पर यह लगता है कि मैं उन जैसी मजबूत...
एक लंबी छलांग लगाने की क्या आवश्यकता है! पग पग धरो और जीवन के पथ पर संभल संभल कर आगे बढ़ो।
तुम जिंदा हो, सांस ले रहे हो। क्या यह काफी नहीं खुद को प्रेरित करने के लिए!