मन की दुनिया
रास्ते पर कदम बढ़ाये थे एक उत्साहित मन से लेकिन मंजिल तक पहुंचते पहुंचते हतोत्साहित हो गई घर लौटकर अपने कमरे में बंद होकर फिर...
रास्ते पर कदम बढ़ाये थे एक उत्साहित मन से लेकिन मंजिल तक पहुंचते पहुंचते हतोत्साहित हो गई घर लौटकर अपने कमरे में बंद होकर फिर...
इस त्योहार उपहारों की बौछार उपहार में प्यार घुला मेरे दिल के रंग सा जीवन को मुस्कुराते हुए जीने की एक युवा उमंग सा सबके...
जब यह अच्छी तरह से तुम्हें पता है कि वह आदमी हर तरह से सही है तो बार-बार, हर क्षण उसकी परीक्षा क्यों लेते रहते...
अवहेलना करी तो किसकी एक चारों दिशाओं में प्रकाश बिखेरते सुबह के उगते सूरज की, अंधकार की नहीं! एक गुलशन को महकाते चहुं ओर खुशबू...
मेरी पायल है बिना घुंघरुओं की लेकिन मेरे जी में आ रहा है कि इन्हें बांधकर अपने पैरों में नाचूं जंगल में ही नाचती किसी...
मैं एक पेड़ पत्तों को संग लिए हवाओं को भी।
मैं खामोश हूं खामोशी से देख रही हूं अपने मन के उपवन में खिलते प्रेम के महकते फूलों को दुनिया के बनावटीपन से उकता गई...
अपनों को अपना मानती हूं उनसे दिल से सच्चा प्यार करती हूं अपने मन को लाख समझाती हूं पर जाने अनजाने फिर लौट कर उन...
बच्चों का साथ एक नव ऊर्जा से भर देता है जीवन के कैनवास में चटकीले रंग और शिराओं में बहते लहू से यौवन की तरंग...
चांद तक तो पहुंचु फिर जानूं कि चांद के पार क्या होगा चांद के पार क्या होगा एक दूसरा चांद होगा दूसरे चांद के पार...
गुलाब और कांटे संग संग, रहते बेशक हों एक दूसरे से तंग तंग एक दूसरे को गले लगाकर मिलाये रखते पर अंग अंग गुलाब की...
लाइटहाउस अंधकार में प्रकाश भरता है जल मार्ग को प्रकाशित करता है जहाजों को, उसमें सवार मुसाफिरों को राह भटकने से बचाता है उन्हें मंजिल...