पेड़ के नीचे खड़ी होकर
पेड़ के नीचे खड़ी होकर मैं सोचूं बस पेड़ के बारे में इसके पत्तों की हरियाली के बारे में इसके तने की मजबूती के बारे...
पेड़ के नीचे खड़ी होकर मैं सोचूं बस पेड़ के बारे में इसके पत्तों की हरियाली के बारे में इसके तने की मजबूती के बारे...
वह हमेशा आवेश में तनाव में क्रोध में, रोष में जकड़ा ही रहता है बिना किसी ठोस कारण इसे मूर्खता की पराकाष्ठा नहीं कहेंगे तो...
गुलाब के उपवन में खड़ी मैं भी महकती हूं एक गुलाब सी उसका रंग मलकर अपने गालों पर मैं भी हो जाती हूं उसके रंग...
सूर्य लाल है चांद का रंग पीला मेरा सांवला।
एक माता पिता का प्यार ही तो ऐसा है जो उनके इस दुनिया में न रहने से उनके बच्चों के दिल से जुदा होकर...
सर्कस में जैसे एक जोकर दुनिया की इस सर्कस में मैं भी एक वैसी ही जोकर दिल दुखी है एक दर्पण सा टूटकर न जाने...
दिल कभी कितना बेचैन हो जाता है पता नहीं इसके अंदर कितना कुछ भरा है और यह कितना कुछ कहना चाहता है कोई सुनने वाला...
मन की अंगीठी से उठ रहा धुआं तन को जलाता है मन को भी जलाता है यह आसमान तक ऊंचा उठता है आसमान के पार...
दर्द सहने की क्षमता बढ़ानी होगी कश्ती है तो आखिरकार अपने ही जीवन की खुद ही खेकर पार लगानी होगी।
साथी तो सच्चा वही है जो उम्र भर साथ निभाए दिल के रिश्तों को बांधे तो किसी पक्की डोर से कच्ची डोर से जो गर...
एक राह है एक मंजिल भी है तू कहीं नहीं।
कुछ लोगों के निकम्मेपन की इंतेहा होती है उनकी आंखों में एक बाल के बराबर भी शर्म नहीं होती अपने अच्छे समय में अपने घर...