ओ मेरे कन्हैया
यह दरवाजे के पीछे कौन छिपा है इस पर पड़ा था जो पर्दा वह यकीनन हवा से तो नहीं हिला है वह कौन है जो...
यह दरवाजे के पीछे कौन छिपा है इस पर पड़ा था जो पर्दा वह यकीनन हवा से तो नहीं हिला है वह कौन है जो...
मुझे लगता है कि मैंने कोई गलती कभी नहीं करी है किसी के साथ कोई बुरा व्यवहार नहीं किया है या किसी को जानबूझकर नहीं...
दरवाजों के पीछे क्या है एक दरवाजे के पीछे दूसरा दरवाजा है दूसरे के बाद तीसरा यह घर दरवाजों से भरा है और दरवाजे भी...
मैं तुमसे क्षमा मांगती हूं तुम मुझे दिल से क्षमा कर दो दिल से मेरा बोझ हल्का कर दो मुझे पाप मुक्त कर दो एक...
गर्व से सीना चौड़ा कर और आगे बढ़ क्योंकि ऐ मेरे दोस्त जिंदगी अभी बाकी है सपने अभी जिंदा हैं रास्ते कदम के नीचे हैं...
खुला जो कोई बंद दरवाजा तो राज खुलेगा।
न किसी आसमां की तलाश करो न ही किसी मंजिल की एक इंच जमीन मिल जाये अपने पांव उस पर रखने को यह दुनिया हासिल...
कहीं भी बैठ जाओ जहां बैठने की जगह मिले आज मिल रही है कल यह भी नहीं मिलेगी।
कोई किताब न बन सको तो किताब का कवर पेज या बैक कवर या किताब का कोई एक सुंदर पन्ना बनने की ही कोशिश करो...
यह तो जिंदगी के तमाशे हैं जब तक जिंदगी है यह तमाशे चलते रहेंगे जिंदगी खत्म यह तमाशे भी खत्म।
करीब हैं तभी तो दूर हैं इस दुनिया में ऐसे न जाने कितने लोग हैं जिनसे हम हैं बिल्कुल अनजान देखा जाये न हम उन्हें...
हां चल तो मैं नहीं हूं तेरे मन मुताबिक तो चल तू मुझे बता कि क्या तू ही है मेरे मन मुताबिक।