एक पतझड़ के कहर की तरह ही
मैं खुद में कहीं परत दर परत सिमट रही हूं खामोश हो रही हूं गुम हो रही हूं कली से फूल का बनना यह तो...
मैं खुद में कहीं परत दर परत सिमट रही हूं खामोश हो रही हूं गुम हो रही हूं कली से फूल का बनना यह तो...
उसकी मुस्कुराहट एक गुलाब की खिलती कली सी है फूलों की बहार सी है सूरज की किरणों की एक फुहार सी है सारी कायनात उसके...
तेरे से मेरा रिश्ता न खुदा सा न इंसान सा।
मेरे घर की छत से अपना सिर उठाकर ऊपर की तरफ देखने पर एक आकाश नजर आता है मैं जहां जहां जाती हूं यह मेरे...
गर्व है मुझे अपने मां बाप पर जिन्होंने मुझे जन्म दिया और मुझे इस धरती पर लाये मुझे अच्छी शिक्षा दी अच्छे संस्कार दिये अच्छी...
कहीं कुछ न कुछ तो बहुत गलत घटित हो रहा है मेरे साथ उसका व्यवहार अनुचित है अमानवीय है अप्राकृतिक है मन को ठेस पहुंचाता...
कल रात जो देखा वह कोई सपना था या कोई सुंदर सुनहरा सच चांद आसमान में नहीं था वह मेरे साथ मेरे शयनकक्ष में मेरे...
सुबह कमरे की खिड़की से बाहर झांका तो देखा कि चारों तरफ धुंध की चादर फैली थी सर्दियों की सुबह थी दिसंबर महीने की तो...
दिनभर सूरज की तरह बनने का प्रयत्न करो और रात के चांद का दिन के सूरज का सांझ को ढलने के पश्चात इंतजार करो रात...
ऐसी भी अपनी जीवन संगिनी की क्या गुलामी कि सारे रिश्तों का गला ही रेत दिया सबको मौत के घाट उतार दिया इस रूपवती की...
जिंदगी की कहानी वही पुरानी कभी लगे रूहानी कभी सुहानी कभी डरावनी दोस्त तो कभी दुश्मन सी।
कोई अजनबी नहीं यहां एक मैं ही खुद से अजनबी हूं यहां राह चलते किसी नये मुसाफिर से मिलने पर उसकी न पिछली न ही...