वह सफेद ढीली ढाली टी-शर्ट
मुझे याद है वह सफेद ढीली ढाली टी-शर्ट जो मैंने पाई थी इनाम के तौर पर राह चलते सड़क किनारे रुक कर एक गायन...
मुझे याद है वह सफेद ढीली ढाली टी-शर्ट जो मैंने पाई थी इनाम के तौर पर राह चलते सड़क किनारे रुक कर एक गायन...
यादें हमेशा के लिए होती हैं काश ये यादें मीठी, सुहानी और लुभावनी हों कड़वी यादें जो मन में टीस उभारती हों दुख देती हों...
ऐ नीले फूल हरी पत्तियों के साथ तुम एक मोर से पंख फैलाये हवाओं संग नृत्य करते कितने सुंदर प्रतीत होते हो तुम्हारी सुंदरता से...
मैंने तुम्हें बुलाया पास अपने कुछ कहने के लिए मैं जो कहना चाहता था वह कह न पाया तुमने वह सुन लिया जो मैंने कहा...
एक खिलते फूल सा देखा था सपना रात्रि की बेला में बंद आंखों से उन पर पड़ी हुई मेरी पलकों की घनेरी चिलमन के तले...
टूटते होंगे सपने रात के आकाश से ही टूटते हुए किसी तारे की तरह इसका मतलब यह नहीं कि मैं या फिर मेरे जैसा ही...
औरत फौलाद की बनी होती है जब टूटता है उस पर कोई दुखों का पहाड़ मन से होती है दुखी पड़ जाती है इस दुनिया...
जीवन है तो संघर्ष तो इसमें निहित अवश्य ही होगा रास्ता सामने दिख रहा हो फिर भी मन उस पर चलने को न हो तैयार...
क्या मैं अपने घर के कमरे से उठकर सच में एक जंगल की तरफ जाऊं या किसी जंगल की एक कोरी कल्पना को अपने अंखियों...
यह आकाश एक परिंदे सा ही पंख फैलाये।
किसी के शब्दों में गर एक सुगंधित महक नहीं होती तो वह शख्स एक फूलों से लदी हुई महकती डाल नहीं बल्कि एक बासी फूलों...
ऐ बारिश की बूंद सुनाओ तुम अब मुझे कहानी उस आसमान की जहां से तुम आई हो अपना सब कुछ तो तुम पीछे छोड़कर आ...