हर किसी की आंख में तलाशे अपनापन
कोई परिचित हो या अपरिचित अपना हो या पराया उसकी आंखें बंद हों या खुली वह तुम्हारी तरफ देख रहा हो या नहीं वह तुम्हें...
कोई परिचित हो या अपरिचित अपना हो या पराया उसकी आंखें बंद हों या खुली वह तुम्हारी तरफ देख रहा हो या नहीं वह तुम्हें...
मेरा तकिया मेरा साथी रात को मेरे संग होता जैसे दीया संग बाती यह रात भर सोता या जगता इसकी यह ही जाने मैं तो...
एक फूल सी खिल जाऊं एक जलतरंग सी बज जाऊं फूल जो मुरझा जाये तो महक रह जाये जलतरंग का साज जो टूट जाये तो ...
दीवार पर चिड़िया बैठी रहो उड़ना नहीं।
लिखने वाले में जादू नहीं होता यह बात सौ फीसदी सच है कि कई बार कलम ही जादुई होती है उस जादुई कलम के हाथ...
यह दुनिया भी एक जंगल है इस जंगल में विचरने पर तुम्हारे हाथ क्या लगता है यह तुम्हारी किस्मत पर निर्भर करता है कोई भला...
कितनी कमबख्त हूं मैं कि खुद के अलावा मैं किसी और को जानती ही नहीं अपने गमों को भी मैं मोहब्बत की दुकान कहती हूं...
दिल बोलता है कलम लिखती है स्याही बिखेरती है कागज समेटता है जो कोई मेरे लिखे कलाम को पढ़ता है क्या वह मेरे दिल में...
घर से निकलकर चलो दुनिया की रौनक देखते हैं भीड़ के बीच से गुजरते हुए खुद के खोये हुए वजूद को कहीं खोजते हैं चेहरों...
नीला आसमां नीली मेरी आंखें भी नील नदी सी।
आसमान से उतरकर सूरज तुम आज आ जाओ ना मेरे पास लेकिन मुझे जला मत देना मेरे भीतर निहित बुराइयों को बेशक जला देना लेकिन...
क्या कहूं कई बार कुछ भी समझ नहीं आता आवाजों के शोर में सच्चाई की आवाज दब गई है उसे कोई सुनता नहीं कोई सुनना...