किसी इंसान का दिल ही गर इस दुनिया के रेगिस्तान में भटक गया तो
किसी का कभी दिल न टूटे किसी की मोहब्बत उससे कभी न रूठे जिंदगी रहते हुए भी जिंदगी का साथ न छूटे अपनों के होते...
किसी का कभी दिल न टूटे किसी की मोहब्बत उससे कभी न रूठे जिंदगी रहते हुए भी जिंदगी का साथ न छूटे अपनों के होते...
जिस घर में मैं रहती हूं जो मेरे मां-बाप का घर है जहां मैं पैदा हुई जहां मेरा बचपन बीता जिस घर के जर्रे जर्रे...
किसी के हो या न हो लेकिन मेरे बिस्तर के नीचे तो एक राक्षस स्थाई रूप से रहता है शाम का धुंधलका रात के अंधियारे...
आवेश में आकर तुम कुछ गलत काम को अंजाम मत दे देना ओ पथिक वह कृत्य कहीं इस हद तक गलत न हो कि तुम्हें...
मुझे लगता है कि मैं खुद में ठीक हूं खुद से संतुष्ट हूं खुद से मुझे कोई शिकायत नहीं खुद से मैं खफा नहीं खुद...
स्वत: ही कभी खुलती हूं, कभी सिकुड़ती हूं न जाने कौन बला हूं मैं कभी खुद से मिलती तो कभी बिछड़ती हूं मैं।
लोग तो गलतफहमियां करवायेंगे ही लेकिन आप इन गलतफहमियों को अपने दिल में पालते क्यों हैं वैसे जिन्हें होता है प्यार वह दिल में पड़ी...
दिल का रिश्ता बिना प्रेमोल्लास का बिना भाव का
पत्थर से बनी इस मिट्टी के दीये की बाती है इसे जलाऊं तो जलाऊं कैसे किस्मत की अमिट रेखाएं जो खींची हुई हैं जिंदगी की...
दिल में हो प्यार तो चारों तरफ बिखरे रहते हैं प्यार के रंग भी कोई आंखों के सामने हो या न हो उसे पा लेते...
चिड़िया के पंख होते हैं और वह दिखते भी हैं उन पंखों के सहारे ही वह जमीन से ऊपर खुद को उठाकर आसमान में उड़ने...
जब मैं सुबह की चाय पीती हूं आसमान के सूरज की तरफ देखती हुई तो उसकी तपिश उसकी लालिमा उसकी ऊर्जा को एक चाय सा...